साजबहार की सरपंच सोनम लकड़ा को रीपा के कार्य को समय सीमा तीन महीने के अंदर नहीं कराने के कारण अनुविभागीय अधिकारी फरसाबहार ने दिनांक 18/01/2024 को पद से हटाने का आदेश दिया था जिसे सरपंच ने हाईकोर्ट बिलासपुर में अधिवक्ता मनोज चौहान के माध्यम से चुनौती दी थी हाईकोर्ट ने कलेक्टर के समक्ष अपील का प्रावधान होने के कारण अपीलेट कोर्ट जाने का निर्देश देते हुए याचिका खारिज कर दिया था। इसके पश्चात सरपंच ने उच्च न्यायालय का आदेश व अनुविभागीय अधिकारी के आदेशो को अधिवक्ता मनोज चौहान,मनीष गुप्ता, के माध्यम से माननीय सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ शासन को फटकार लगाई और कहा अनुसूचित एरिया के चुनी हुई महिला जनप्रतिनिधि को इस तरह नही निकाला जा सकता
सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्ट्या दोनों कोर्ट के आदेश को दोषपूर्ण मानते हुए सभी कोर्ट के आदेशो को पलटते हुए ग्राम पंचायत सरपंच के रूप में कार्य काल समाप्त होते तक लगातार कार्य करने का आदेश दिया है साथ ही छत्तीसगढ़ शासन को चार सप्ताह के भीतर सरपंच को परेशान करने के एवज मे एक लाख रुपए मुवावजा देने का भी आदेश दिया है, और साथ ही जिन अधिकारियो ने ऐसा किया जांच कर मुआवजा राशि उस अधिकारी से वसूलने का भी आदेश है ।
अपने याचिका में सरपंच ने सुप्रीम कोर्ट में कही थी कि उन्हें हटाने के पूर्व प्राकृतिक न्याय का पालन नहीं किया गया है तथा उन्हें उचित सुनवाई का अवसर नहीं दी गई है।पंचायत के किसी भी निर्माण कार्य के लिए सिर्फ सरपंच ही जिम्मेदार नहीं होता है।
इस संबंध में हमने सरपंच से बात की सरपंच का कहना है मुझ पर कोई वित्तीय अनियमितता और न ही कोई धोटाले का आरोप था मुझे लगता है कि किसी राजनैतिक दबाव के कारण मुझे निकाला गया था, परंतु सत्य की जीत हुई है मै सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करती हुॅ ।
*इस संबंध में हमने जिला पंचायत सदस्य विष्णु कुलदीप व अधिवक्ता से बात की उन्होंने कहा ये मामला सरकार पर सुप्रीम कोर्ट का जोरदार तमाचा है राज्य मे अधिकारी कर्मचारी बेकाबू है नियम कानून को ताक पर रखकर आदेश करते है इस आदेश के बाद ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियो का हौसला बढेगा । इस आदेश के बाद ऐसे अधिकारियो को सबक लेना चाहिए जो आकाओ को खुश करने के लिए कुछ भी आदेश कर जाते है ।*





