साजबहार की सरपंच सोनम लकड़ा को रीपा के कार्य को समय सीमा में तीन महीने के अंदर नहीं करने के कारण अनुविभागीय अधिकारी फरसाबहार ने दिनांक 18/01/2024 को पद से हटाने का आदेश दिया था जिसे सरपंच ने हाईकोर्ट बिलासपुर में अधिवक्ता मनोज चौहान के माध्यम से चुनौती दी थी हाईकोर्ट ने कलेक्टर के समक्ष अपील का प्रावधान होने के कारण अपीलेट कोर्ट जाने का निर्देश देते हुए याचिका खारिज कर दिया था। इसके पश्चात सरपंच ने उच्च न्यायालय का आदेश व अनुविभागीय अधिकारी के आदेशो को अधिवक्ता मनोज चौहान,मनीष गुप्ता, पवन श्रीवास्तव के माध्यम से माननीय सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जिसमें दिनांक 05/04/24 को सुनवाई हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्ट्या दोनों कोर्ट के आदेश को दोषपूर्ण मानते हुए सभी कोर्ट के आदेशी को स्टे कर दिया है और साथ ही आदेश दिया है की याचिकाकर्ता *"बिना किसी व्यवधान या रुकावट के ग्राम पंचायत सरपंच के रूप में लगातार कार्य करेगी"* साथ ही जवाब प्रस्तुत करने का आदेश देते हुए पंचायत सचिव छत्तीसगढ़ शासन, कलेक्टर जशपुर, अनुविभागीय अधिकारी फरसाबहार, अनुविभागीय अधिकारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा फरसाबहार व मुख्य कार्यपालन अधिकारी फरसाबहार को नोटिस जारी करते हुए जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
अपने याचिका में सरपंच ने सुप्रीम कोर्ट में कही है कि उन्हें हटाने के पूर्व प्राकृतिक न्याय का पालन नहीं किया गया है तथा उन्हें उचित सुनवाई का अवसर नहीं दी गई है प्रकरण में सुनवाई के दौरान कोई जांच नहीं हुई एवं आरोप पत्र व दस्तावेज भी नहीं दी गई है इसके लिए उन्होंने उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय के कई न्याय दृष्टांत की प्रति भी प्रस्तुत किया है जिसके अनुसार सरपंच को पद से हटाने के पूर्व सुनवाई के दौरान सिविल प्रक्रिया की सभी नियम पालन करने होते हैं जिसमें दस्तावेज देने से लेकर जांच, गवाही, प्रतिपरीक्षण भी शामिल हैं, पंचायत के किसी भी निर्माण कार्य के लिए सिर्फ सरपंच ही जिम्मेदार नहीं होता है।
इस संबंध में हमने सरपंच से बात की सरपंच का कहना है मुझ पर कोई वित्तीय अनियमितता और न ही कोई धोटाले का आरोप है, मुझे छोटी सी बात के लिए निकला गया है जिसके लिए सिर्फ मैं जिम्मेदार नहीं हूं, इसके पूर्व भी मुझे अविश्वास प्रस्ताव में निकला गया था जिसमें मुझे निकालने के लिए प्रस्ताव के दौरान मुझे वोट डालने नहीं दिया गया जबकि वोट देना मेरा संवैधानिक अधिकार है मैं एक आदिवासी महिला सरपंच हूं मुझे निकालने के लिए जिस तरह षड्यंत्र हुआ उसे देखने से लगता है कि महिला आरक्षण, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ यह सब सिर्फ कागजों में है, न्याय के लिए मैं कई जगह गई परंतु मेरे पहुंचने से पहले ऊपर से फोन आ जाता था परंतु अब मुझे सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला है, मैं ऊपर वालों से निवेदन करती हूं कि एक आदिवासी महिला सरपंच को निकालने के लिए फोन ना करें।
*इस संबंध में हमने जिला पंचायत सदस्य विष्णु कुलदीप व अधिवक्ता से बात की उन्होंने कहा अभी कुछ दिनों से छोटी-छोटी बातों में टारगेट करके कुछ सरपंचों को निकालने का प्रयास हुआ जिसमें अधिकतर महिला सरपंच हैं, उनकी बातें राजस्व न्यायालय में भी नहीं सुनी जा रही है जिले के वकीलों में भी यही चर्चा हो रही है, कि राजस्व न्यायालय में कोई काम कराना है तो ऊपर से फोन कराना पड़ेगा उन्ही का बात यहां चलता है, यह उपर वाले कौन है ? ये ऊपर से न्यायालय में फोन कर दबाव बनाने वालो को कम से कम न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नही करना चाहिए यह कहीं ना कहीं प्रशासनिक आतंकवाद या तानाशाही की ओर इशारा करती है जिसका खामियाजा भविष्य मे देखने को मिलेगा।*ITEM NO.19 COURT NO.4 SECTION IV-C
S U P R E M E C O U R T O F I N D I A
RECORD OF PROCEEDINGS
Petition(s) for Special Leave to Appeal (C) No(s).7279/2024
(Arising out of impugned final judgment and order dated 29-02-2024
in WA No.109/2024 passed by the High Court of Chhattisgarh at
Bilaspur)
SONAM LAKRA Petitioner(s)
VERSUS
STATE OF CHHATTISGARH & ORS. Respondent(s)
(FOR ADMISSION and IA No.72830/2024-EXEMPTION FROM FILING O.T.)
Date : 05-04-2024 This petition was called on for hearing today.
CORAM :
HON'BLE MR. JUSTICE SURYA KANT
HON'BLE MR. JUSTICE SANDEEP MEHTA
For Petitioner(s) Mr. Manish Kumar Gupta, AOR
Mr. Pawan Shrivastava, Adv.
Mr. Manoj Chouhan, Adv.
Ms. Sangita Gupta, Adv.
Mr. Prabhat Chowdhary, Adv.
For Respondent(s)
UPON hearing the counsel the Court made the following
O R D E R
1.
Heard learned counsel for the petitioner.
2.
Issue notice, returnable on 12.07.2024.
3.
Meanwhile, the operation of the impugned orders passed by
the Sub-Divisional Officer(Revenue), Pharsabahar, District Jashpur,
Chhattisgarh, removing the petitioner from the Post of Sarpanch,
Gram Panchayat, Sajbahar, as well as that of the High Court, shall
remain stayed.
4.
Resultantly, the petitioner shall be re-instated as the
Sarpanch of the Gram Panchayat and shall be allowed to perform her
duties without any hindrance.
(SATISH KUMAR YADAV) (PREETHI T.C.)
ADDITIONAL REGISTRAR COURT MASTER (NSH)
गौरतलब है कि रीपा का कार्य जिले के हर तहसील मे दो ग्राम पंचायत मे चल रहा है जिसमे अधिकतर अधूरे है अब देखना है सभी सरपंचो पर कार्रवाई होती है या चुन कर टारगेट करके ये समय बतायेगा।




