जशपुर जिले के आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के विवाद मे जिला एवं सत्र न्यायालय ने सी एम ओ कोतबा नगर पंचायत बसंत कुमार बुनकर की अग्रिम ज़मानत याचिका को यह कहकर ख़ारिज कर दिया कि अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की धारा 18 के तहत अग्रिम ज़मानत का प्रावधान नहीं किया गया है इन आधारों पर आरोपी को अग्रिम ज़मानत का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होता, फलतः आरोपी का अग्रिम ज़मानत आवेदन अंतर्गत धारा 438दं०प्र०सं०निरस्त किया जाता है। सी एम ओ बसंत कुमार बुनकर कई दिनों से फरार चल रहे हैं, ऐसे मे नगर पंचायत कोतबा अंतर्गत शासन की कई जनकल्याणकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। सरगुजा क्रांति न्यूज़ पोर्टल ने पूर्व मे भी इस विषय पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया था कि सी एम ओ जैसे जिम्मेदार पद पर रहते हुए इस तरह का कृत्य करना निंदनीय है, जो कतई सभ्य समाज बर्दाश्त नहीं कर सकेगा। माननीय न्यायालय के इस फैसले से तो सी एम ओ को अपनी करनी का फल भुगतना ही होगा, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोतबा नगर पंचायत के जनकल्याणकारी योजनाओं को सुचारु रूप से क्रियान्वयन करने के लिए शासन द्वारा क्या कदम लिया जाता है यह देखना महत्वपूर्ण होगा? गौरतलब हो की अभी राज्य मे आदर्श आचार सहिता लागु है और उक्त अधिकारी के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही प्रशासन की और से ना करना भी कहीं ना कहीं आदर्श आचार संहिता का उलंघन है?





